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#✍️ अनसुनी शायरी #🎤 महफिल ए शायरी #एक रचना रोज ...✍︎✍︎ #💚 लाइफ़ की शायरी #✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ अनसुनी शायरी - dIfeg नरम बाहों में आराम फिर 98/ की जो साथ मिलकर गुजरी  चाहिए..! वोशाम फिर खामोशियां. dIfeg नरम बाहों में आराम फिर 98/ की जो साथ मिलकर गुजरी  चाहिए..! वोशाम फिर खामोशियां. - ShareChat