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#👩‍🎨WhatsApp प्रोफाइल DP #feeling #poems #poetry ##️⃣DilShayarana💘
👩‍🎨WhatsApp प्रोफाइल DP - खिड़की और मैं खिड़कीहेरं दैँख़नीहूँ ह्यर दोच हर रोज़, पर बाहर मैँखुद को देखती हूँ। चलती रहती है নামংকী 4 लोग , गाड़ियाँ , आवाज़ें . सब कुछ अपनीं जगह तेज़, बेपरवाह| 34 यहीं ठहूरी हुई। खिड़की के उस पार ज़िन्दगी भाग रही होती है, मैंउसे बसगौरइत हुए देखती हूँ। कभी लगता है ये खिड़की ही एक र्श्ता है मेरा दुनिया से, जिसे मैं खोल सकती हूँ, पर पार नहीं कर पार्ती। आती है अंदर, थोड़ी सहवाड कतथी हड़ी स्दीर हलचल, परं वो भी ज्यादा देर नहीं ठहरती जैसे कोई एहसास जो छूकर चला जाए। करभी कभी सोचती हूँ॰ अगरये खिड़की न रहोती तो क्या मैं दुनियां को मिस करती? या फिर खूद को? खिड़की चुप रहती है, मैं भी। दोनों के बीच बस एक खामोश समझ है चो बाहर दिखाती है॰ और मैं अंदर छुपाती हूँ। खिड़की और मैं खिड़कीहेरं दैँख़नीहूँ ह्यर दोच हर रोज़, पर बाहर मैँखुद को देखती हूँ। चलती रहती है নামংকী 4 लोग , गाड़ियाँ , आवाज़ें . सब कुछ अपनीं जगह तेज़, बेपरवाह| 34 यहीं ठहूरी हुई। खिड़की के उस पार ज़िन्दगी भाग रही होती है, मैंउसे बसगौरइत हुए देखती हूँ। कभी लगता है ये खिड़की ही एक र्श्ता है मेरा दुनिया से, जिसे मैं खोल सकती हूँ, पर पार नहीं कर पार्ती। आती है अंदर, थोड़ी सहवाड कतथी हड़ी स्दीर हलचल, परं वो भी ज्यादा देर नहीं ठहरती जैसे कोई एहसास जो छूकर चला जाए। करभी कभी सोचती हूँ॰ अगरये खिड़की न रहोती तो क्या मैं दुनियां को मिस करती? या फिर खूद को? खिड़की चुप रहती है, मैं भी। दोनों के बीच बस एक खामोश समझ है चो बाहर दिखाती है॰ और मैं अंदर छुपाती हूँ। - ShareChat