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💔💔💔💔💔#☝अनमोल ज्ञान #😍 Whatsapp स्टेटस 📱 #✨हमार विचार #🌸 सत्य वचन #❤️जीवन के सीख
☝अनमोल ज्ञान - Reality कितनी बड़ी विडंबना है= पहले तालाब खोदते हैं, ৪ম फिर उसमें जल भरते हैं, और फिर उसमें मछलियाँ छोड़ देते हैं। बेचारी मछलियाँ इसे उपकार समझती हैं। वे सोचती हैं देखो, इस व्यक्ति ने हमारे लिए कितना सुंदर संसार बनाया है।' वे तैरती हैं, खेलती हैं, हमारा मनोरंजन करती हैं, मानो हर क्षण धन्यवाद दे रही हों। নালান কা নজ্ত্ অল, किनारों की हरियाली, சச  खुला आकाश लगता है यही संसार है, स्वतंत्रता है, यही जीवन है। धीरे-धीरे वे अपने असली समुद्र को भूल जाती हैं। उन्हें यह कैद भी कृपा लगने लगती है। लेकिन एक दिन अचानक उसी तालाब में जाल डाला जाता है। विश्वास में डूबी मछलियाँ धोखे से उसमें फँस जाती हैं। वे तड़पती हैं, छटपटाती हैं, पर तब तक बहुत देर हो होती है। ತ್ಹ್ जिस हाथ को वे अपना रक्षक समझती थीं, वही हाथ उन्हें बाज़ार तक ले जाता है। 3=8 44 f4 எள 81 जब खरीदार उनकी साँसें छीन रहा होता है, तब भी उन्हें भरोसा रहता है- 'मेरा मालिक मुझे बचा लेगा। ' पर मालिक नहीं आता जब उनका शरीर भोजन बन जाता है 3R तब उनके काँटे खरीदार सें हैं= पूछते हमारी गलती क्या थी? खरीदार शांत स्वर में कहता है- নন तुम उस दिन नहीं फँसी थीं তিম নিন আাল ভালা যমা থা तो उसी दिन फँस गई थीं। ಸಾನ್ दिन तालाब खोदा गया था। क्योंकि विनाश अचानक नहीं आता, उसकी नींव बहुत पहले रख दी जाती है। जाल तो केवल अंतिम 2, घटना सुरक्षा में थी असल कैद तो उस कृत्रिम जिसे मछलियाँ अपना संसार समझ बैठी थीं। जीवन में भी अक्मर ऐसा ही होता है। हर सुविधा स्वतंत्रता नहीं होती, संरक्षण प्रेम नहीं होता, ಹೆಕ हर मुस्कुराता हुआ हाथ हमेशा अपना नहीं होता। कूर्क हललिए बनाए जाते हैं নলাল @k0_229 ताकि एक दिन डालना आसान हा जाए। जाल Reality कितनी बड़ी विडंबना है= पहले तालाब खोदते हैं, ৪ম फिर उसमें जल भरते हैं, और फिर उसमें मछलियाँ छोड़ देते हैं। बेचारी मछलियाँ इसे उपकार समझती हैं। वे सोचती हैं देखो, इस व्यक्ति ने हमारे लिए कितना सुंदर संसार बनाया है।' वे तैरती हैं, खेलती हैं, हमारा मनोरंजन करती हैं, मानो हर क्षण धन्यवाद दे रही हों। নালান কা নজ্ত্ অল, किनारों की हरियाली, சச  खुला आकाश लगता है यही संसार है, स्वतंत्रता है, यही जीवन है। धीरे-धीरे वे अपने असली समुद्र को भूल जाती हैं। उन्हें यह कैद भी कृपा लगने लगती है। लेकिन एक दिन अचानक उसी तालाब में जाल डाला जाता है। विश्वास में डूबी मछलियाँ धोखे से उसमें फँस जाती हैं। वे तड़पती हैं, छटपटाती हैं, पर तब तक बहुत देर हो होती है। ತ್ಹ್ जिस हाथ को वे अपना रक्षक समझती थीं, वही हाथ उन्हें बाज़ार तक ले जाता है। 3=8 44 f4 எள 81 जब खरीदार उनकी साँसें छीन रहा होता है, तब भी उन्हें भरोसा रहता है- 'मेरा मालिक मुझे बचा लेगा। ' पर मालिक नहीं आता जब उनका शरीर भोजन बन जाता है 3R तब उनके काँटे खरीदार सें हैं= पूछते हमारी गलती क्या थी? खरीदार शांत स्वर में कहता है- নন तुम उस दिन नहीं फँसी थीं তিম নিন আাল ভালা যমা থা तो उसी दिन फँस गई थीं। ಸಾನ್ दिन तालाब खोदा गया था। क्योंकि विनाश अचानक नहीं आता, उसकी नींव बहुत पहले रख दी जाती है। जाल तो केवल अंतिम 2, घटना सुरक्षा में थी असल कैद तो उस कृत्रिम जिसे मछलियाँ अपना संसार समझ बैठी थीं। जीवन में भी अक्मर ऐसा ही होता है। हर सुविधा स्वतंत्रता नहीं होती, संरक्षण प्रेम नहीं होता, ಹೆಕ हर मुस्कुराता हुआ हाथ हमेशा अपना नहीं होता। कूर्क हललिए बनाए जाते हैं নলাল @k0_229 ताकि एक दिन डालना आसान हा जाए। जाल - ShareChat