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#✒️ કવિની કલમ
✒️ કવિની કલમ - शीर्षकः तक़दीर का खेल तक़दीर ने साथ दिया तो तुम्हें नचा देंगे , महफ़िल में अपने नाम के चर्चे करा देंगे। जो आज हमें देखकर नज़रें चुरा रहे हैं , कल वही लोग हमारी मिसालें सुना देंगे। मंज़िल की चाहत में हम यूँ ही नहीं निकले, ठोकर भी अगर मिली , रास्ते बना देंगे। हमसे मुकाबला करना इतना आसान नहीं , पत्थर पडे़ राहों में, दरिया बहा देंगे। वक़्त की करवटों से डरना हमारी फ़ितरत नहीं , आँधियों के रुख़ को भी हँसकर बदल देंगे। 'प्रकाश" ये मत समझना हम यूँ ही ख़ामोश बैठे हैं, वक़्त आया तो अपनी पहचान बना देंगे। लिखित प्रकाश पंडित शीर्षकः तक़दीर का खेल तक़दीर ने साथ दिया तो तुम्हें नचा देंगे , महफ़िल में अपने नाम के चर्चे करा देंगे। जो आज हमें देखकर नज़रें चुरा रहे हैं , कल वही लोग हमारी मिसालें सुना देंगे। मंज़िल की चाहत में हम यूँ ही नहीं निकले, ठोकर भी अगर मिली , रास्ते बना देंगे। हमसे मुकाबला करना इतना आसान नहीं , पत्थर पडे़ राहों में, दरिया बहा देंगे। वक़्त की करवटों से डरना हमारी फ़ितरत नहीं , आँधियों के रुख़ को भी हँसकर बदल देंगे। 'प्रकाश" ये मत समझना हम यूँ ही ख़ामोश बैठे हैं, वक़्त आया तो अपनी पहचान बना देंगे। लिखित प्रकाश पंडित - ShareChat