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#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🌞 Good Morning🌞
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - ग़ज़ल जिसको रखता हूँ ख़यालों में गुलाबों की तरह उसकी में खटकता हूँ मैं काँटों की तरह नज़रों धूप आँगन में उतरती है दुआओं की तरह चाँदनी आती है মী নঙ্কা্যী কী নফঙ্ক चुपके उसके रुख़्सार पे ठहरी हैं अभी जो बूँद्रें तो लगती हैं सितारों की तरह कहूँ मुझको सच हैं मेरे शाने पे गेसू उसके जब भी खुलते एक इक जुल्फ़ बिखरती है घटाओं की तरह इश्क जब हो ही गया है तो निभाओ उसको हो उसे अपने गुनाहों की तरह क्यों ர ग़म किसी ठूंठ की मानिंद गढ़े रहते हैं आती है जाती है हवाओं की तरह और ख़ुशी पहले जो इश्क़ के पढ़ते थे क़सीदे अक्सर आज वो देखते हैं उसको गुनाहों की तरह यूँ ही तो कोईं नहीं होता है यारो रोशन इश्क जलना पड़ता है कई बार शरारों की तरह 997 7 गुनाह बन जाता নিঃান  है इबादत रोशन ग़ज़ल जिसको रखता हूँ ख़यालों में गुलाबों की तरह उसकी में खटकता हूँ मैं काँटों की तरह नज़रों धूप आँगन में उतरती है दुआओं की तरह चाँदनी आती है মী নঙ্কা্যী কী নফঙ্ক चुपके उसके रुख़्सार पे ठहरी हैं अभी जो बूँद्रें तो लगती हैं सितारों की तरह कहूँ मुझको सच हैं मेरे शाने पे गेसू उसके जब भी खुलते एक इक जुल्फ़ बिखरती है घटाओं की तरह इश्क जब हो ही गया है तो निभाओ उसको हो उसे अपने गुनाहों की तरह क्यों ர ग़म किसी ठूंठ की मानिंद गढ़े रहते हैं आती है जाती है हवाओं की तरह और ख़ुशी पहले जो इश्क़ के पढ़ते थे क़सीदे अक्सर आज वो देखते हैं उसको गुनाहों की तरह यूँ ही तो कोईं नहीं होता है यारो रोशन इश्क जलना पड़ता है कई बार शरारों की तरह 997 7 गुनाह बन जाता নিঃান  है इबादत रोशन - ShareChat