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चरित्रवान की कथा.....
ऋषि शुकदेव जी राजा जनक के पास दीक्षा लेने गए। राजा जनक ने उनकी परीक्षा लेने के लिए एक सुंदर युवती को उनकी सेवा में भेजा। युवती उनके पलंग के पास बैठ गई, परन्तु शुकदेव जी ने उसे देखकर पैर समेट लिए और उसे बहन कहकर कमरे से बाहर जाने को कहा। इससे राजा जनक ने उनकी संयम और चरित्र की प्रशंसा की।
कबीर परमेश्वर जी ने बताया है कि स्त्री तथा पुरुष आत्मा के ऊपर दो वस्त्र हैं। जैसे गीता अध्याय 2 श्लोक 22 में कहा कि अर्जुन ! जीव शरीर त्यागकर नया शरीर धारण कर लेता है, इसे मृत्यु कहते हैं। यह तो ऐसा है जैसे मनुष्य पुराने वस्त्र त्यागकर नए पहन लेता है। इसलिए आत्म तत्व को जान।
🙏🙏बंदीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज
संत रामपाल जी महाराज #कबीर


