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#✍मेरे पसंदीदा लेखक
✍मेरे पसंदीदा लेखक - जिंदगी का कड़वा सच शमशान की राख देख कर मन में. एक ख्याल आया सिर्फ राख होने के f 0 इंसान ज़िन्दगी भर. ೦ से कितना दूसरे ಗಾ जलता है..!! जिंदगी का कड़वा सच शमशान की राख देख कर मन में. एक ख्याल आया सिर्फ राख होने के f 0 इंसान ज़िन्दगी भर. ೦ से कितना दूसरे ಗಾ जलता है..!! - ShareChat