ShareChat
click to see wallet page
search
#✍गुलजारांचे साहित्य
✍गुलजारांचे साहित्य - मैने दिल के दखाजे परलिखा था किअन्दर आना मना है.! इश्क मुस्कूराते हुए बोला माफ करना मैं अंधा हुं..!! मैने दिल के दखाजे परलिखा था किअन्दर आना मना है.! इश्क मुस्कूराते हुए बोला माफ करना मैं अंधा हुं..!! - ShareChat