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#🖋शेरो-शायरी #📝कविता / शायरी/ चारोळी #✍गुलजारांचे साहित्य
🖋शेरो-शायरी - वक़्त आज़मा रहा है, शायद हमें कुछ बता रहा है। बनाया था हमें बहुत मासूम उस ऊपर वाले ने, इसलिए वक़्त हमें ज़माने से लडने के क़ाबिल बना रहा है। शायद वक़्त को फ़िक्र थी मेरी, कि कैसे कटेगी ज़िंदगी मेरी, इसलिए बुरा वक़्त लाकर ज़िंदगी में सबके असली चेहरों से रूबरू करा रहा है। वक़्त मुझे सबकी असलियत दिखा रहा है। insed.by.shruti वक़्त आज़मा रहा है, शायद हमें कुछ बता रहा है। बनाया था हमें बहुत मासूम उस ऊपर वाले ने, इसलिए वक़्त हमें ज़माने से लडने के क़ाबिल बना रहा है। शायद वक़्त को फ़िक्र थी मेरी, कि कैसे कटेगी ज़िंदगी मेरी, इसलिए बुरा वक़्त लाकर ज़िंदगी में सबके असली चेहरों से रूबरू करा रहा है। वक़्त मुझे सबकी असलियत दिखा रहा है। insed.by.shruti - ShareChat