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#जय माँ गायत्री जय गुरुवर
जय माँ गायत्री जय गुरुवर - कहानी SILeus uuil' जो जीवन बदल दे। न्यायाधीश ক্ पेशवाओं aR राजगुरु तथा যম शास्त्री थे उच्चतम HI प्राप्त पर ওনকা 767 सहन बाहाणोचित अपरिग्रह के साथ जुडा हुआ था। तरह छोटी कुटिया में रहते थे और 4 பq க निर्धनों  जैसी सादगी से निजी खर्च चलाते थे। ৎক  3$} புசி 3114& ম ব্রুলাবা का   राजमहल गई। रानियों ने उन्हें भरपूर सम्मान दिया और विद्य  करते आभूषणों वस्त्रों ম तथा बहुमूल्य মময লন कर E 3118 al 3 8 &d & पालकी  में विदा किया। कहा- यह तो कोई रानी है मेरी बाहाणी नही। 3el ஈச Rr 3iR वापस ೯ का दरवाजा बन्द कर लिया। वे पति इशारा समझ गई। राजमहल কা पहुँच कर शास्त्री जी की पत्नी ने सारे वस्त्र-आभूषण उतार दिये। अपने परिधान धारण कर लिये। पुराने घर  लौटी तो शास्त्री जी ने किया उनका स्वागत 3রীয   কমা-বাম্সতী   কী 3ীমন   নাঠাহকি ম बढ कर रहन सहन नहीं अपनाना चाहिए। अखंड ज्योति फरवरी १९८९ कहानी SILeus uuil' जो जीवन बदल दे। न्यायाधीश ক্ पेशवाओं aR राजगुरु तथा যম शास्त्री थे उच्चतम HI प्राप्त पर ওনকা 767 सहन बाहाणोचित अपरिग्रह के साथ जुडा हुआ था। तरह छोटी कुटिया में रहते थे और 4 பq க निर्धनों  जैसी सादगी से निजी खर्च चलाते थे। ৎক  3$} புசி 3114& ম ব্রুলাবা का   राजमहल गई। रानियों ने उन्हें भरपूर सम्मान दिया और विद्य  करते आभूषणों वस्त्रों ম तथा बहुमूल्य মময লন कर E 3118 al 3 8 &d & पालकी  में विदा किया। कहा- यह तो कोई रानी है मेरी बाहाणी नही। 3el ஈச Rr 3iR वापस ೯ का दरवाजा बन्द कर लिया। वे पति इशारा समझ गई। राजमहल কা पहुँच कर शास्त्री जी की पत्नी ने सारे वस्त्र-आभूषण उतार दिये। अपने परिधान धारण कर लिये। पुराने घर  लौटी तो शास्त्री जी ने किया उनका स्वागत 3রীয   কমা-বাম্সতী   কী 3ীমন   নাঠাহকি ম बढ कर रहन सहन नहीं अपनाना चाहिए। अखंड ज्योति फरवरी १९८९ - ShareChat