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#🎤मेरी कविता-शायरी #🤷‍♀️मैं इब्बै के करूँ हूँ?
🎤मेरी कविता-शायरी - नफ़रत इतनी हो गई है तुझसे , अब तेरा नाम भी अच्छा नहीं लगता| जिसे कभी जान से ज़्यादा चाहा था, अब वही इंसान अपना नहीं लगता| नफ़रत इतनी हो गई है तुझसे , अब तेरा नाम भी अच्छा नहीं लगता| जिसे कभी जान से ज़्यादा चाहा था, अब वही इंसान अपना नहीं लगता| - ShareChat