पाक्स्तान को शांति का नावेल देने की मांग उठा दें या एक दो दिन इंतजार करें तब तक शायद मोदी जी का कोई बयान आ जाए.....
पाक्स्तान को विश्व शांति की दिशा में प्रयास के लिए हिम्मत उसी चाय से मिली जो मोदी जी बेचा करते थे क्योंकि चाय पत्ती भले असम की थी, और मग्गे राजस्थान की चीनी मिट्टी से बने।
पर उसमे पानी सिंधु नदी का मिलाया गया था।
वही पानी जो हमने पहलगाम के बाद रोक दिया था।
पानी की कमी से प्यासे मरते पाक्स्तान के पास कोई और रास्ता ही नहीं था इसलिए उन्हें चाय पीकर अपनी प्यास बुझानी पड़ी किंतु जिस तरह संत रविदास के चमड़े वाले कुंड का पानी राजा भरथरी के कुर्ते में गिरा और दाग छुड़ाने की मंशा से उसे चूसकर एक धोबी की लड़की को अध्यात्म की प्राप्ति होती है ठीक उसी तरह मोदी जी की चाय पीकर पाक्स्तान ने आतंकवाद का मार्ग त्याग कर विश्व शांति की दिशा में प्रयास करने शुरू कर दिए।
अल्टिमेटली इसका श्रेय और शांति का नॉवेल राजा भरथरी को देना है या संत रविदास को ये निर्णय जनता का है क्योंकि पाक्स्तान तो केवल कुर्ते के दाग चूसकर उसे साफ करने का प्रयास कर रहा था।😒🤔
#😝 Meme and Trolls #😆 હા હા હા #😜 ફની રિએકશન
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