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#📖 कविता और कोट्स✒️ #💓 दिल के अल्फ़ाज़ #✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 #☝ मेरे विचार
📖 कविता और कोट्स✒️ - हवाओं की भी अपनी अजब सियासतें है साहब. @ कही बुझी राख भड़का दे तो कहीं जलते चिराग़ बुझा दें हवाओं की भी अपनी अजब सियासतें है साहब. @ कही बुझी राख भड़का दे तो कहीं जलते चिराग़ बुझा दें - ShareChat