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#📜मेरी कलम से✒️ #📒 मेरी डायरी #☝ मेरे विचार #🕊️ ऊंची उड़ान 🏃 #💔 हमारी भावनाऐं ❤️
📜मेरी कलम से✒️ - चार दिन की ज़िंदगी में, किस-किस से कतरा कर चलें? ख़ाक थे, ख़ाक पर हैं, ख़ाक में मिल जाएंगे, फिर किस बात पर इतराकर चलें | चार दिन की ज़िंदगी में, किस-किस से कतरा कर चलें? ख़ाक थे, ख़ाक पर हैं, ख़ाक में मिल जाएंगे, फिर किस बात पर इतराकर चलें | - ShareChat