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#🙏🌺ॐ रामदूताय नमः🌺🙏 🙏 जय श्री राम🙏 🙏🌺 जय हनुमानजी 🌺🙏 जय बालाजी महाराज #🌼🙏जय वीर हनुमानजी 💐शुभ मंगलवार 🌼श्री हनुमान चालीसा 🌼
श्री हनुमान जी की महिमा अपार है और उनसे जुड़ी कई पौराणिक कथाएं हैं। यहाँ हनुमान जी की परम भक्ति और उनकी असीम शक्ति को दर्शाने वाली एक बहुत ही सुंदर और प्रसिद्ध कथा दी गई है:
हनुमान जी और सिंदूर की कथा
एक बार लंका विजय के बाद अयोध्या में प्रभु श्री राम का राज्याभिषेक हो चुका था। हनुमान जी हर पल श्री राम और माता सीता की सेवा में मग्न रहते थे।
एक दिन हनुमान जी ने माता सीता को अपने माथे पर लाल रंग का सिंदूर लगाते हुए देखा। हनुमान जी बड़े कौतुक (उत्सुकता) से माता सीता के पास गए और बड़ी मासूमियत से पूछा— "हे माता! आप अपने माथे पर यह लाल रंग का पदार्थ क्यों लगा रही हैं? इससे क्या होता है?"
माता सीता हनुमान जी की इस निष्कपट बात पर मुस्कुराईं और बोलीं— "हे हनुमान! यह सिंदूर है। इसे माथे पर लगाने से मेरे स्वामी और तुम्हारे प्रभु श्री राम की आयु लंबी होती है, उनका स्वास्थ्य अच्छा रहता है और वे हमेशा मुझसे प्रसन्न रहते हैं।"
हनुमान जी ने माता की बात को बहुत गहराई से ले लिया। उन्होंने अपने मन में सोचा— "यदि चुटकी भर सिंदूर लगाने से प्रभु की आयु लंबी होती है और वे प्रसन्न होते हैं, तो अगर मैं अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लूं, तो मेरे प्रभु अमर हो जाएंगे और हमेशा मुझसे बहुत प्रसन्न रहेंगे!"
बस, फिर क्या था! हनुमान जी ने किसी और बात की परवाह नहीं की। उन्होंने ढेर सारा सिंदूर लिया और उसे घी में मिलाकर अपने पूरे शरीर पर मल लिया। उनका पूरा शरीर सिर से लेकर पैर तक बिल्कुल चमकीला नारंगी (लाल) हो गया।
इसी रूप में हनुमान जी झूमते हुए श्री राम की राजसभा में पहुंच गए। जब सभा में बैठे सभी लोगों ने हनुमान जी का यह रूप देखा, तो वे अपनी हंसी नहीं रोक पाए। हर कोई उन पर हंसने लगा।
प्रभु श्री राम ने जब हनुमान जी को इस दशा में देखा, तो उन्होंने उन्हें पास बुलाया और पूछा— "हनुमान! तुमने यह कैसा रूप बना रखा है? पूरे शरीर पर सिंदूर क्यों मल लिया है?"
हनुमान जी ने बहुत ही सरलता और हाथ जोड़कर कहा— "प्रभु! माता सीता ने मुझे बताया कि चुटकी भर सिंदूर लगाने से आपकी उम्र बढ़ती है। मैंने सोचा कि अगर मैं अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लूं, तो आप हमेशा के लिए अमर हो जाएंगे और आपकी कृपा मुझ पर हमेशा बनी रहेगी।"
हनुमान जी की यह निष्काम और निश्छल भक्ति देखकर श्री राम का हृदय भर आया। उनकी आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने हनुमान जी को गले से लगा लिया और कहा— "हनुमान! तुम्हारे जैसा भक्त इस संसार में कोई दूसरा नहीं है। तुम्हारी इस भक्ति से मैं अत्यंत प्रसन्न हूँ।"
> महत्व: प्रभु श्री राम ने हनुमान जी को वरदान दिया कि जो भी भक्त हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करेगा, उस पर हनुमान जी और स्वयं श्री राम की विशेष कृपा रहेगी। इसी कथा के कारण आज भी हनुमान जी की मूर्तियों पर सिंदूर (चोला) चढ़ाया जाता है।
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जय श्री राम! जय पवनपुत्र हनुमान!