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#जीवन की सीख
जीवन की सीख - मेरी कहानी " IT कभी॰कभी रात इतनी खामोश हो जाती है कि अपनी ही साँसों की आवाज़़ भी भारी mm೯ बिस्तर पर लेटे-लेटे बस छत को देखते रहते हैं, पर नींद जैसे रास्ता ही भूल जाती है.. दिल में इतने सवाल होते हैं जिनका जवाब कोई नहीं देता, और आँखें बिना वजह भीगती 8 हैं. घर में सब पास होते हैं, फिर भी ऐसा लगता है जैसे कोई अपना बहुत दूर चला गया ೯. फोन हाथ में होता है, पर किसी से बात करने का मन नहीं करता, क्योंकि दर्द शब्दों में आता ही नहीं. . पूरी रात बस करवटें बदलते गुजर जाती है, [ತ೯೯ಣ೯ಸಕ್ और सुबह फिर वही झूठी 45#8. ताकि कोई पूछे सकें মন ঠীব্ধ ৯". लेकिन सच तो ये होता है कि अंदर ही अंदर कोई हर रात थोड़ा-्थोड़ा टूट जाता है... ! मेरी कहानी " IT कभी॰कभी रात इतनी खामोश हो जाती है कि अपनी ही साँसों की आवाज़़ भी भारी mm೯ बिस्तर पर लेटे-लेटे बस छत को देखते रहते हैं, पर नींद जैसे रास्ता ही भूल जाती है.. दिल में इतने सवाल होते हैं जिनका जवाब कोई नहीं देता, और आँखें बिना वजह भीगती 8 हैं. घर में सब पास होते हैं, फिर भी ऐसा लगता है जैसे कोई अपना बहुत दूर चला गया ೯. फोन हाथ में होता है, पर किसी से बात करने का मन नहीं करता, क्योंकि दर्द शब्दों में आता ही नहीं. . पूरी रात बस करवटें बदलते गुजर जाती है, [ತ೯೯ಣ೯ಸಕ್ और सुबह फिर वही झूठी 45#8. ताकि कोई पूछे सकें মন ঠীব্ধ ৯". लेकिन सच तो ये होता है कि अंदर ही अंदर कोई हर रात थोड़ा-्थोड़ा टूट जाता है... ! - ShareChat