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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - कर्म और भाग्य -शिव दृष्टिकोण से-- कर्म वह है, जो जीव अपनी इच्छा की पूर्ति के लिए करता है। मन में इच्छा उठती है, तो उसे पूरा करने जव के लिए प्रयास किया जाता है ~ यही कर्म है। हर कर्म एक इच्छा पूर्ति है, तीव्र इच्छा विवेक  और अविवेक को जागृत करती है, और यही  भाग्य को अपनी ओर आकर्षित करती है। भाग्य जीव के पूर्व कर्मों का परिणाम है। यह बिना प्रयास के भी जीवन में घटता है, पुण्य कर्मों और नए कर्मों के आधार पर पुराने  कई बार दिशा बनाता है, और कई बार बदल ঠনা ট1 a इसलिए कभी बिना मेहनत चीज़ें मिल जाती हैं, और कभी मेहनत के बाद भी वैसा फल नहीं मिलता। * कर्म जीव की कोशिश है *भाग्य परिस्थितियों का निर्माण है। निष्कर्ष कर्म जीव के में है,लेकिन भाग्य उसी कर्म हाथों का लौटकर आया हुआ परिणाम है। कर्म और भाग्य -शिव दृष्टिकोण से-- कर्म वह है, जो जीव अपनी इच्छा की पूर्ति के लिए करता है। मन में इच्छा उठती है, तो उसे पूरा करने जव के लिए प्रयास किया जाता है ~ यही कर्म है। हर कर्म एक इच्छा पूर्ति है, तीव्र इच्छा विवेक  और अविवेक को जागृत करती है, और यही  भाग्य को अपनी ओर आकर्षित करती है। भाग्य जीव के पूर्व कर्मों का परिणाम है। यह बिना प्रयास के भी जीवन में घटता है, पुण्य कर्मों और नए कर्मों के आधार पर पुराने  कई बार दिशा बनाता है, और कई बार बदल ঠনা ট1 a इसलिए कभी बिना मेहनत चीज़ें मिल जाती हैं, और कभी मेहनत के बाद भी वैसा फल नहीं मिलता। * कर्म जीव की कोशिश है *भाग्य परिस्थितियों का निर्माण है। निष्कर्ष कर्म जीव के में है,लेकिन भाग्य उसी कर्म हाथों का लौटकर आया हुआ परिणाम है। - ShareChat