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Mp - Janiye raja bhojh ke bare me #bhojshala
bhojshala - महाराजा भोज ३६ तरह के # आयुधविज्ञान के ज्ञाता थे महाराजा भोज स्वयं ७२ कलाओं और ३६ तरह के आयुध विज्ञान के ज्ञाता थे। 3নক্া কাযকাল মন १०६५ तक रहा, उन्होंने अनेक मंदिरों, घाटों  तालाबों एवं विद्यालयों का निर्माण करवाया। राजा भोज स्वयं विद्वान होने के साथ ही विद्वानों के संरक्षक भी थे। जैन सम्प्रदाय के अभयदेवजी ने सूरी पद प्राप्त किया। काशी के महान पंडित भाव बृहस्पति ने शैव संप्रदाय के सिद्धांतों का अध्ययन एवं प्रतिपादन किया। स्थापना से लगातार २७१ वर्ष तक भोजशाला केंद्र बनी रही। ज्ञान का महाराजा भोज ३६ तरह के # आयुधविज्ञान के ज्ञाता थे महाराजा भोज स्वयं ७२ कलाओं और ३६ तरह के आयुध विज्ञान के ज्ञाता थे। 3নক্া কাযকাল মন १०६५ तक रहा, उन्होंने अनेक मंदिरों, घाटों  तालाबों एवं विद्यालयों का निर्माण करवाया। राजा भोज स्वयं विद्वान होने के साथ ही विद्वानों के संरक्षक भी थे। जैन सम्प्रदाय के अभयदेवजी ने सूरी पद प्राप्त किया। काशी के महान पंडित भाव बृहस्पति ने शैव संप्रदाय के सिद्धांतों का अध्ययन एवं प्रतिपादन किया। स्थापना से लगातार २७१ वर्ष तक भोजशाला केंद्र बनी रही। ज्ञान का - ShareChat