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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - !! कर्म का सत्य !! एक दिन अर्जुन ने श्रीकृष्ण से कहा, " प्रभु, लोग मुझे बिना कारण दुःख क्यों देते हैं। कृष्ण मुस्कराए और अर्जुन , हर आँसू का कारण सामने नहीं ব্রীল; दिखता , पर हर दुःख का बीज कर्म में छिपा होता है। " उन्होंने आगे कहा , "जो आज तुझे चोट दे रहा है वह भी अपने कर्मों से बँधा है। तू अपना कर्म থল্ল अर्जुन की आँखें भर आई। कृष्ण बोले , रख। यही है कर्म कभी चुप नहीं रहता। देर से सही , पर न्याय अवश्य करता है। यह सुनकर अर्जुन का मर्न शांत हो गया , और उसे विश्वास हो गया कि ईश्वर हर कर्म देख रहा है। !! कर्म का सत्य !! एक दिन अर्जुन ने श्रीकृष्ण से कहा, " प्रभु, लोग मुझे बिना कारण दुःख क्यों देते हैं। कृष्ण मुस्कराए और अर्जुन , हर आँसू का कारण सामने नहीं ব্রীল; दिखता , पर हर दुःख का बीज कर्म में छिपा होता है। " उन्होंने आगे कहा , "जो आज तुझे चोट दे रहा है वह भी अपने कर्मों से बँधा है। तू अपना कर्म থল্ল अर्जुन की आँखें भर आई। कृष्ण बोले , रख। यही है कर्म कभी चुप नहीं रहता। देर से सही , पर न्याय अवश्य करता है। यह सुनकर अर्जुन का मर्न शांत हो गया , और उसे विश्वास हो गया कि ईश्वर हर कर्म देख रहा है। - ShareChat