ITIHAAS KE PANNON SE
🇮🇳 14 साल का वो क्रांतिकारी, जिसने अंग्रेज़ों को चुनौती दे दी!
नाम था — सुबोध राय ‘झुंकू’।
सिर्फ 14 साल की उम्र में उन्होंने 18 अप्रैल 1930 को चटगाँव शस्त्रागार विद्रोह में हिस्सा लिया। यह विद्रोह सूर्य सेन ‘मास्टरदा’ के नेतृत्व में अंग्रेज़ी शासन के खिलाफ हुआ था।
विद्रोह के बाद सुबोध राय गिरफ्तार कर लिए गए। अंग्रेज़ों ने उनसे क्रांतिकारी साथियों के बारे में जानकारी लेने के लिए कठोर यातनाएँ दीं, लेकिन उन्होंने साथियों के बारे में कुछ नहीं बताया।
1 मार्च 1932 को उन्हें चटगाँव आर्मरी रेड केस में आजीवन निर्वासन (Transportation for Life) की सज़ा सुनाई गई और उन्हें अंडमान की सेल्युलर जेल भेज दिया गया।
कालापानी की कठिन परिस्थितियों के बीच उन्होंने अध्ययन किया और बाद में कम्युनिस्ट विचारधारा से प्रभावित हुए।
सबसे महत्वपूर्ण बात—
वे 1947 में नहीं, बल्कि 1940 में रिहा हुए थे।
आज़ादी के बाद भी उन्होंने अपना सार्वजनिक जीवन जारी रखा और राजनीतिक तथा ऐतिहासिक कार्यों में योगदान दिया।
27 अगस्त 2006 को उनका निधन हुआ।
जिस उम्र में बच्चे अपने भविष्य के सपने देखते हैं, उस उम्र में सुबोध राय ने देश की आज़ादी के लिए अपना भविष्य दाँव पर लगा दिया था।
🇮🇳 ऐसे गुमनाम क्रांतिकारियों की कहानी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचनी चाहिए।
क्या आपने पहले कभी सुबोध राय ‘झुंकू’ का नाम सुना था?
👇 कमेंट में बताइए।
— इतिहास के पन्नों से
#I ❤️️ इंडियन आर्मी 🇮🇳 #💓 फ़ौजी के दिल की बातें #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #😇 चाणक्य नीति