Sagar Singh
511 views • 24 days ago
वैसे तो सभी को बचपन में जो अंग और खून कुदरती मिलता है वह स्वस्थ मजबूत सकुशल सक्रिय होता है खून पतला रहता है अब उम्र बढ़ती है वैसे वैसे ऊर्जा शक्ति बंटवारे में फंसती है खून गाढ़ा और चाल रक्त संचार रक्तचाप गति कम होने लगती है अंग धीरे धीरे कमजोर पड़ने लगते हैं।मलों की उत्सर्जन क्रिया कम होने लगती है फिर शुरू होता है "*" सर्वेषाम् रोगाणाम् निदानम् कूपिता मला: ।"*" चरक संहिता और सुश्रुत संहिता बाग्भट संहिता तथा अष्टांगहृदय स्थान निदान अध्याय में इसका वर्णन किया है। हालांकि 1980 तक भारत में गलत खानपान दिनचर्या जीवनशैली के Life style diseases के केस न के बराबर थे लेकिन अब आज महज 40-45 साल में ही उतना बड़ा परिवर्तन हो गया जो मुगल काल में, ब्रिटिश हुकूमत में भी नहीं हुआ गोवंश व स्त्री मर्यादा अनुशासन का पतन 1980 के बाद तेज हुआ साथ ही साथ मानसिक प्रदुषण तनाव, पर्यावरण प्रदुषण, सामाजिक नियमों में बदलाव, भारतीय संस्कृति संस्कार आचरण व्यवहार में बदलाव हालात यह है कि भारत तेजी से वर्णसंकर हो रहा है मनुष्य में मिलावट हाइब्रिड बीज आ गया है । मैं नहीं तुलसीदास जी ने कहा "*" भये वर्णसंकर सब लोगा।"*" श्री रामचरितमानस फिर "*" लोभहिं ओढहीं लोभहिं डासन।शिश्नोदर पर जमपुर त्रासन।"*"यहां "*"शिश्न+उदर "*" कलियुग में पुरुष मुत्रेन्द्रिय पर व पेट पर यमलोक से अधिक त्रास होगा। "*" कलिकाल बिहाल किये मनुजा। नहीं मानत क्वो अनुजा तनुजा।।"*"भाई की बेटी बेटे की बेटी से भी मनुष्य कामक्रीड़ा करेंगे 🙏🏻 #🙏सुविचार📿 #☝आज का ज्ञान #MOTIVATIONAL #satya vachan #Suvichar
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