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**वह रात ~ आचार्य जी द्वारा एक कविता** *वह रात* बस यूँ ही अनायास, उदासी सी छा गयी थी, सूरज के डूबने के साथ ही, और मैं – मुरझाया, उदास देखता था गहरा रही रात को तारों की उभर रही जमात को । ____ प्रत्येक पल युग सा प्रतीत होता था, परितः मेरे सारा जग सोता था, पर मैं, यूँ ही अनायास, मुरझाया उदास, तकता था कभी समय, कभी आकाश को रे गगन, काश तुझे भी समय का भास हो । _____ रात्रि अब युवा थी दो पहर पर दूर उतनी ही लग रही थी अब भी सहर, सुबह का बेसब्र इंतज़ार करता था, पर दूर थी सुबह ये सोच डरता था, एक रात, यूँ ही अनायास। _____ सुबह झट हर लेगी मेरे संताप को, निशा-भैरवी काल देवी के वीभत्स प्रलाप को, सवेरा अब मोक्ष-पल जान पड़ता था, पल-पल घड़ी की ओर ही ताकता था, एक रात, यूँ ही अनायास। _____ अंततः हुआ वह भी जिसका मुझे इंतजार था, सूर्यदेव निकले, जग खग-कोलाहल से गुलज़ार था, चहकती थी दुनिया, चलती थी दुनिया, हर्षित हो बार-बार हँसती थी दुनिया, हुआ वह सब जो रोज़ होता था, पर मेरा विकल मन अब भी रोता था, सूरज के आगमन में (हाय!) कुछ विशेष नहीं था, _____ मेरे लिए अब कोई पल शेष नहीं था क्यों सूरज का आना भी मुझे संतप्त कर गया, राह जिसकी तकता था, वही सवेरा देख मैं डर गया। _____ एक रात यूँ ही अनायास, मैं- मुरझाया और उदास । ~ प्रशांत (21 अक्टूबर 1995, धनतेरस रात्रि 1 बजे) Aachrya prshant ji 🖤🤍 #Aachrya parsant #realty of life #👉 लोगों के लिए सीख👈 #❤️जीवन की सीख #Life Truth
Aachrya parsant - 66 If you love someone, wings; give them give them light; give them self-knowledge; and let them fly on their own. Pouoat 66 If you love someone, wings; give them give them light; give them self-knowledge; and let them fly on their own. Pouoat - ShareChat