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#📖जीवन का लक्ष्य🤔
📖जीवन का लक्ष्य🤔 - कैसा यह बंधन है, कैसा यह अटूट सनेह है? 8 प्रकृति! क्यों दिल करता है हर घड़ी , तेरी आगोश में सो जाने का? मेरा, तेरी वादियों में खो जाने का? क्यों एक यही ख़्वाब है बयां करते होंगे शायर, गुलाब की ख़ूबसूरती किताबों में, हम तो बस सादगी से तुझे 'फूल' लिखकर अपना लेते हैं। शब्दों में कहाँ सिमटती है, ये जादुई घटाएँ न्यारी तेरी, पर तेरी तरुवर की छांव का सुकूँ , माँ के आंचल जैसा है। कैसा यह बंधन है, कैसा यह अटूट सनेह है? 8 प्रकृति! क्यों दिल करता है हर घड़ी , तेरी आगोश में सो जाने का? मेरा, तेरी वादियों में खो जाने का? क्यों एक यही ख़्वाब है बयां करते होंगे शायर, गुलाब की ख़ूबसूरती किताबों में, हम तो बस सादगी से तुझे 'फूल' लिखकर अपना लेते हैं। शब्दों में कहाँ सिमटती है, ये जादुई घटाएँ न्यारी तेरी, पर तेरी तरुवर की छांव का सुकूँ , माँ के आंचल जैसा है। - ShareChat