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#☝रहीम की सीख🌟
☝रहीम की सीख🌟 - रहीम दास जी के प्रति दोहे मत तोडो चटकाय। रहिमन धागा प्रेम का ट्रूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ परि जाय।। रूठे   सूजन मनाइए जो रूठे सौ बार। पोइए , टूटे मुक्ताहार।। रहिमन फिर फिर =_ रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि। काम आवे सुई, कहा करे तरवारि।।  जहाँ जो रहीम गति दीप की॰ कुल कपूत गति सोय। बारे उजियारो लगै, बढ़़े अँधेरो होय।। নিন रहिमन पानी राखिए पानी सब सून। पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून।। तरुवर फल नहिं खात हैं॰ सरवर पियहिं न पान। कहि रहीम परकाज हित, संपति सँचहि सुजान रहीम दास जी के प्रति दोहे मत तोडो चटकाय। रहिमन धागा प्रेम का ट्रूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ परि जाय।। रूठे   सूजन मनाइए जो रूठे सौ बार। पोइए , टूटे मुक्ताहार।। रहिमन फिर फिर =_ रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि। काम आवे सुई, कहा करे तरवारि।।  जहाँ जो रहीम गति दीप की॰ कुल कपूत गति सोय। बारे उजियारो लगै, बढ़़े अँधेरो होय।। নিন रहिमन पानी राखिए पानी सब सून। पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून।। तरुवर फल नहिं खात हैं॰ सरवर पियहिं न पान। कहि रहीम परकाज हित, संपति सँचहि सुजान - ShareChat