एक प्रसिद्ध माता रानी की कथा है — माँ वैष्णो देवी की कथा:
बहुत समय पहले त्रेता युग में माँ आदिशक्ति ने धर्म की रक्षा के लिए वैष्णवी रूप धारण किया। वे धरती पर आकर तपस्या करने लगीं। उसी समय भैरवनाथ नाम का एक तांत्रिक उनकी शक्ति से प्रभावित होकर उनका पीछा करने लगा।
माँ वैष्णवी उससे बचते हुए पहाड़ों की ओर गईं। रास्ते में उन्होंने हनुमान जी को अपनी रक्षा के लिए बुलाया। हनुमान जी को प्यास लगी तो माँ ने धरती पर बाण चलाकर जल निकाला — वही आज बाणगंगा कहलाती है।
फिर माँ एक गुफा में 9 महीने तपस्या करती रहीं, जिसे आज अर्धकुमारी गुफा कहते हैं। अंत में जब भैरवनाथ गुफा तक पहुँच गया, तब माँ ने महाकाली रूप धारण कर उसका सिर काट दिया।
भैरवनाथ का सिर दूर पहाड़ी पर गिरा। मरते समय उसने क्षमा मांगी। माँ ने उसे वरदान दिया कि जो भक्त उनके दर्शन करेगा, वह भैरवनाथ के दर्शन किए बिना यात्रा पूर्ण नहीं मानेगा।
तभी से माता वैष्णो देवी के दर्शन के साथ भैरवनाथ मंदिर जाना भी शुभ माना जाता है।
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