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#जयंती 25-04-26
जयंती - जगद्गुरु आकारवाणी आदि शंकराचार्य (788 $দ্ী . ८२० ईस्वी ) जयंती पर शत-्शत नमन उनका जन्म केरल राज्य के कालड़ी नामक स्थान पर हुआ था। अल्पायु में ही संन्यास ग्रहण कर लिया, भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए संपूर्ण भारत का भ्रमण किया। वे ' अद्वैत वेदांत दर्शन के प्रतिपादक थे, जिसका मुख्य सिद्धांत अहं ब्रह्मास्मि' है। भारत के चारों कोनों में चार मठों की स्थापना की, ज्योतिर्मठ, शारदा पीठ, गोवर्धन मठ, द्वारका शारदा पीठ। श्रृंगेरी उनके द्वारा रचित 'भज गोविंदम' और 'निर्वाण षट्कम' जैसे ग्रंथ भक्ति और ज्ञान का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करते हैं। विस्तृत उपनिषदों , श्रीमद्धगवदगीता और ब्रह्मसूत्र पर अपनी व्याख्याएँ और भाष्य लिखे। शास्त्रार्थ के माध्यम से विद्वानों को धर्म के वास्तविक स्वरूप का बोध कराया। जगद्गुरु आकारवाणी आदि शंकराचार्य (788 $দ্ী . ८२० ईस्वी ) जयंती पर शत-्शत नमन उनका जन्म केरल राज्य के कालड़ी नामक स्थान पर हुआ था। अल्पायु में ही संन्यास ग्रहण कर लिया, भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए संपूर्ण भारत का भ्रमण किया। वे ' अद्वैत वेदांत दर्शन के प्रतिपादक थे, जिसका मुख्य सिद्धांत अहं ब्रह्मास्मि' है। भारत के चारों कोनों में चार मठों की स्थापना की, ज्योतिर्मठ, शारदा पीठ, गोवर्धन मठ, द्वारका शारदा पीठ। श्रृंगेरी उनके द्वारा रचित 'भज गोविंदम' और 'निर्वाण षट्कम' जैसे ग्रंथ भक्ति और ज्ञान का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करते हैं। विस्तृत उपनिषदों , श्रीमद्धगवदगीता और ब्रह्मसूत्र पर अपनी व्याख्याएँ और भाष्य लिखे। शास्त्रार्थ के माध्यम से विद्वानों को धर्म के वास्तविक स्वरूप का बोध कराया। - ShareChat