ShareChat
click to see wallet page
search
#महाकाल की नगरी उज्जैन 🚩 #🕉 महाकालेश्वर मंदिर🛕 #🙏ज्योतिर्लिंग दर्शन #🙏जय महाकाल📿 #उज्जैन बाबा ज्योतिर्लिंग दर्शन 🙏
महाकाल की नगरी उज्जैन 🚩 - श्री महाकालेश्वर 1 १७ मई २०२६, रविवार भस्म आरती का महत्व भस्म आरती श्रृंगार आरती गें भगवान श्री महाकाल को 11TU भस्म से अभिषेक किया जाता है। यह आरती जीवन की अनित्यता का बोध कराती है और भक्ति व वैराग्य की भावना को जागृत करता हे। यह आरती समस्त एवं पापों कानाश ऊज  नकारात्मक करती ह तथा शिव कृपा प्रदान करती हे। मुख्य श्रृंगार : সাড নানা পচাকাল কা মম্স সাংনী श्रृंगार अत्यंत दिव्य एवं मननोहक है। त्रिनेत्र रत्नजड़ित भुभूत चंदन, श्वेत रेखाएँ TSU; और चौंदी के अलंकारों से सुसज्जित कर बाबा का श्रृंगार किया गया है। गेंदा, गुलाब और रजनीगंधा की मालाओं से dd ' एवं लिंग सुंदर दवंग से अलंकृत किया সদক गया है। पुष्य एवं माला श्रृंगार गेंदा, गुलाब, रजनीगंधा एवं बिल्वपत्र के पुष्प अर्पित किए गए है। बाबा के मस्तक पर गेंदा एवं गुलाब की सुंदर वेणी, चारों ओर रजनोगंधा एवं गंदा को गालाएं तथा बिल्वपत्र से विशेव सज्जा को गई ह। वस्त्र एवं अलंकरण बाबा महाकाल को काला रेशमी वस्त्र  चादी के मुकूट अरपित 1 गया ह। त्रिशूल, रुद्राक्ष माला नागाभूषण, कुंडल 3াং নাঁনী কী মূত্ত ম নানা কা থূৃযাং अत्यंत दिव्य एवं तेजस्वी बना हे। महाभोग प्रसाद आज बाबाको विदिथ व्यंजनों का भोग সাদিন কি4া দ4া - লঞ্ভ; 4ভI, দালঙুসা; फल, पंचामृत खीर, पुडी॰ दाल॰ सब्जी, चना प्रसाद एवं मेया अपित किए गए है। यह महाभोग भक्तां को शरद्ा ओर ८४ जय श्री महाकाल सaपण का प्रतीक ह। भक्तों के लिए संदेश Gil 4 भाक्ति ओर िश्वाल क साथ जो महाकाल का है, उसका कोई काल नहीं ೩edls বানা সমাকাল কা মাস সানো ৭ মাস্সিলিন চানা ম; ওম ভীবন ৭ মুম; থাঁনি; মঘৃ্ডি ३ँ हर हर महादेव ऊँ और स्वारच्य की प्राप्ति होती ह। श्री महाकालेश्वर 1 १७ मई २०२६, रविवार भस्म आरती का महत्व भस्म आरती श्रृंगार आरती गें भगवान श्री महाकाल को 11TU भस्म से अभिषेक किया जाता है। यह आरती जीवन की अनित्यता का बोध कराती है और भक्ति व वैराग्य की भावना को जागृत करता हे। यह आरती समस्त एवं पापों कानाश ऊज  नकारात्मक करती ह तथा शिव कृपा प्रदान करती हे। मुख्य श्रृंगार : সাড নানা পচাকাল কা মম্স সাংনী श्रृंगार अत्यंत दिव्य एवं मननोहक है। त्रिनेत्र रत्नजड़ित भुभूत चंदन, श्वेत रेखाएँ TSU; और चौंदी के अलंकारों से सुसज्जित कर बाबा का श्रृंगार किया गया है। गेंदा, गुलाब और रजनीगंधा की मालाओं से dd ' एवं लिंग सुंदर दवंग से अलंकृत किया সদক गया है। पुष्य एवं माला श्रृंगार गेंदा, गुलाब, रजनीगंधा एवं बिल्वपत्र के पुष्प अर्पित किए गए है। बाबा के मस्तक पर गेंदा एवं गुलाब की सुंदर वेणी, चारों ओर रजनोगंधा एवं गंदा को गालाएं तथा बिल्वपत्र से विशेव सज्जा को गई ह। वस्त्र एवं अलंकरण बाबा महाकाल को काला रेशमी वस्त्र  चादी के मुकूट अरपित 1 गया ह। त्रिशूल, रुद्राक्ष माला नागाभूषण, कुंडल 3াং নাঁনী কী মূত্ত ম নানা কা থূৃযাং अत्यंत दिव्य एवं तेजस्वी बना हे। महाभोग प्रसाद आज बाबाको विदिथ व्यंजनों का भोग সাদিন কি4া দ4া - লঞ্ভ; 4ভI, দালঙুসা; फल, पंचामृत खीर, पुडी॰ दाल॰ सब्जी, चना प्रसाद एवं मेया अपित किए गए है। यह महाभोग भक्तां को शरद्ा ओर ८४ जय श्री महाकाल सaपण का प्रतीक ह। भक्तों के लिए संदेश Gil 4 भाक्ति ओर िश्वाल क साथ जो महाकाल का है, उसका कोई काल नहीं ೩edls বানা সমাকাল কা মাস সানো ৭ মাস্সিলিন চানা ম; ওম ভীবন ৭ মুম; থাঁনি; মঘৃ্ডি ३ँ हर हर महादेव ऊँ और स्वारच्य की प्राप्ति होती ह। - ShareChat