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#⏳शब्द से शायरी: वक़्त
⏳शब्द से शायरी: वक़्त - और मैं अपनी तन्हाई से थक कर अक्सर छत पर जाता हू , जो बात ज़मीन पर अधूरी रह गई, वो अल्फ़ाज़ मैं आसमां से बताता हूं।। और मैं अपनी तन्हाई से थक कर अक्सर छत पर जाता हू , जो बात ज़मीन पर अधूरी रह गई, वो अल्फ़ाज़ मैं आसमां से बताता हूं।। - ShareChat