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#☝आज का इतिहास #✅ वाट्सएप स्टेटस #📢प्रदेश की बड़ी अपडेट🌏 #🚨देशभर की अपडेट्स📢
☝आज का इतिहास - संस्कार का वो पुराना दौर विचार साग जब दादा जी बाहर से शाम को घर में आते तब अचानक से शोर थम जाया करता था। खुसर पुसर में घर की औरतों की आवाज बदल जाया करती थी। पिताजी भी अपना हुक्का चिलम समेट कर दादा जी के सम्मान में खड़े हो जाते थे। पिताजी , चाचा , ताऊ सब  अपनी कमाई दादा जी के हाथ पर रख दिया करते थे। दादा जी घर के सर्वेसर्वा थे। उनका फैसला अंतिम हुआ करता था। गलती करने पर दादा जी किसी को भी थप्पड़ लगा सकते थे | उनका थप्पड़ खाकर कोई चूं भी नहीं करता था। fg रिश्ता पसंद करने घर के जवान बच्चों के का हक सिर्फ दादा जी के पास था। उनका निर्णय लोहे की लकीर हुआ करता था। ತ್ಡಾ್೯ಣ೫  औरतों में शर्मो हया थी। सच 46 उनका सबसे बडा गहना था। ೧ को भी शर्माते हुए देखा है। वो दौर गजब था। पैसे कम थे मगर रिश्तों में प्रगाढ़ प्रेम था। कमाई देखकर इज्जत नहीं होती थी उम्र में बड़े की इज्जत थी। क्या आपको याद है वो दौर?? संस्कार का वो पुराना दौर विचार साग जब दादा जी बाहर से शाम को घर में आते तब अचानक से शोर थम जाया करता था। खुसर पुसर में घर की औरतों की आवाज बदल जाया करती थी। पिताजी भी अपना हुक्का चिलम समेट कर दादा जी के सम्मान में खड़े हो जाते थे। पिताजी , चाचा , ताऊ सब  अपनी कमाई दादा जी के हाथ पर रख दिया करते थे। दादा जी घर के सर्वेसर्वा थे। उनका फैसला अंतिम हुआ करता था। गलती करने पर दादा जी किसी को भी थप्पड़ लगा सकते थे | उनका थप्पड़ खाकर कोई चूं भी नहीं करता था। fg रिश्ता पसंद करने घर के जवान बच्चों के का हक सिर्फ दादा जी के पास था। उनका निर्णय लोहे की लकीर हुआ करता था। ತ್ಡಾ್೯ಣ೫  औरतों में शर्मो हया थी। सच 46 उनका सबसे बडा गहना था। ೧ को भी शर्माते हुए देखा है। वो दौर गजब था। पैसे कम थे मगर रिश्तों में प्रगाढ़ प्रेम था। कमाई देखकर इज्जत नहीं होती थी उम्र में बड़े की इज्जत थी। क्या आपको याद है वो दौर?? - ShareChat