ShareChat
click to see wallet page
search
#जय माँ गायत्री जय गुरुवर
जय माँ गायत्री जय गुरुवर - हरि शरणं आखर मधुर मनोहर दोऊ, बरन बिलोचन जन जिय जोऊ, ससुमिरत सुलभ सुखद सब काहू, निबाहू लोक लाहु परलोक राम नाम के दोनों अक्षर मधुर और मनोहर हैं, जो वर्णमाला रूपी शरीर के नेत्र हैं, भक्तों के जीवन हैं तथा स्मरण करने में सबके लिए सुलभ और सुख देने वाले हैं और जो इस लोक में लाभ और परलोक अर्थात् में निर्वाह करते हैं भगवान के दिव्य धाम में दिव्य देह से सदा नियुक्त रखते हैं। भगवत्सेवा में श्रीरामचरितमानस, बालकांड १९/१ हरि शरणं आखर मधुर मनोहर दोऊ, बरन बिलोचन जन जिय जोऊ, ससुमिरत सुलभ सुखद सब काहू, निबाहू लोक लाहु परलोक राम नाम के दोनों अक्षर मधुर और मनोहर हैं, जो वर्णमाला रूपी शरीर के नेत्र हैं, भक्तों के जीवन हैं तथा स्मरण करने में सबके लिए सुलभ और सुख देने वाले हैं और जो इस लोक में लाभ और परलोक अर्थात् में निर्वाह करते हैं भगवान के दिव्य धाम में दिव्य देह से सदा नियुक्त रखते हैं। भगवत्सेवा में श्रीरामचरितमानस, बालकांड १९/१ - ShareChat