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कबीर, क्षमा समान न तप,सुख नहीं संतोष समान। तृष्णा समान नहीं व्याधि कोई,धर्म न दया समान॥ परमेश्वर कबीरजी ऐसा कहा गया है कि क्षमा करना सबसे बड़ा तप है, उसके समान कोई तप नहीं है। संतोष के बराबर कोई सुख नहीं है। #सत भक्ति संदेश
सत भक्ति संदेश - [ धर्म ध कबीर, क्षमा समान न तप, सुख नहीं संतोष समान। तृष्णा समान नहीं व्याधि कोई, धर्म न दया समान।। परमेश्वरकबीरजी ऐसा कहा गया है कि क्षमा करना सबसे बड़ा तप है, उसके समान कोई तप नहीं है। संतोष के बराबर कोई सुख नहीं है। किसी वस्तु को पाने की इच्छा (तृष्णा ) के समान कोई रोग नहीं है, और दया के समान कोई धर्म नहीं है। बंदीछोड़ सतगुरु रामपालजी महाराज @SATLOKTVGUJARAT @SATLOKTVGUJARAT @SATLOK TV GUJARAT   [ धर्म ध कबीर, क्षमा समान न तप, सुख नहीं संतोष समान। तृष्णा समान नहीं व्याधि कोई, धर्म न दया समान।। परमेश्वरकबीरजी ऐसा कहा गया है कि क्षमा करना सबसे बड़ा तप है, उसके समान कोई तप नहीं है। संतोष के बराबर कोई सुख नहीं है। किसी वस्तु को पाने की इच्छा (तृष्णा ) के समान कोई रोग नहीं है, और दया के समान कोई धर्म नहीं है। बंदीछोड़ सतगुरु रामपालजी महाराज @SATLOKTVGUJARAT @SATLOKTVGUJARAT @SATLOK TV GUJARAT - ShareChat