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#✒️ કવિની કલમ
✒️ કવિની કલમ - वर्षों से इंतज़ार बरसों से तेरी राह में आँखें बिछा रखी हैं, मैंने अपनी साँसों में तेरी याद सजा रखी है। हर शाम तेरे आने की आहट को सुनती हूँ, दिल ने अब भी उम्मीद की शम्मा जला रखी है। मौसम बदले, लोग बदले, वक़्त भी गुज़र गया, 7@4[ मैंने मगर तेरी चाहत दिल रखी है। चाँद से पूछूँ हर रात, तेरा कोई पता मिले, तन्हाई ने मेरी दुनिया ही बना रखी है। शायद किसी मोड़ पर तू फिर मेरा हो जाए, ज़िंदा बना रखी है। इक आस ने अब तक मुझको लिखित प्रकाश पंडित वर्षों से इंतज़ार बरसों से तेरी राह में आँखें बिछा रखी हैं, मैंने अपनी साँसों में तेरी याद सजा रखी है। हर शाम तेरे आने की आहट को सुनती हूँ, दिल ने अब भी उम्मीद की शम्मा जला रखी है। मौसम बदले, लोग बदले, वक़्त भी गुज़र गया, 7@4[ मैंने मगर तेरी चाहत दिल रखी है। चाँद से पूछूँ हर रात, तेरा कोई पता मिले, तन्हाई ने मेरी दुनिया ही बना रखी है। शायद किसी मोड़ पर तू फिर मेरा हो जाए, ज़िंदा बना रखी है। इक आस ने अब तक मुझको लिखित प्रकाश पंडित - ShareChat