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प्रातः कालीन श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन 🔱 | 07-मई-2026 आज बाबा महाकाल का शांत, सौम्य और ध्यानमग्न स्वरूप भक्तों को दिव्य अनुभूति प्रदान कर रहा है। भांग लेपन, अर्धचंद्र तिलक, बादाम बिंदु माला और विशेष त्रिपुंड श्रृंगार से सुसज्जित बाबा का यह अलौकिक स्वरूप शिव तत्व की अनंत ऊर्जा का प्रतीक बना। भस्म आरती केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन की नश्वरता और आत्मा की अमरता का दिव्य संदेश है। उज्जैन नगरी में प्रातःकालीन आरती के दौरान भक्तों ने “हर हर महादेव” के जयघोष के साथ बाबा महाकाल के इस अद्भुत स्वरूप के दर्शन किए। 🙏🔱 जो बाबा महाकाल की शरण में आता है, उसके भय, बाधाएं और दुख स्वयं समाप्त होने लगते हैं। ❤️ #mahakal #mahadev #ujjain #bhasmaarti #महाकालेश्वर का दिव्य दर्शन #महाकालेश्वर
महाकालेश्वर का दिव्य दर्शन - श्री महाकालेश्वर, उज्जैन   ८४  विशेष प्रातः कालीन भस्म आरती दर्शन आज का 07-May-2026 मुखाकृति सोम्य पुष्प मुकुट हल्के केसरिया अधरों गेंदा, सकेद और गुलाबी फूलों से दो॰स्तरीय सुंदर के साथ आज बाचा को अत्यंत शांत मुकूट सजाया गया है। Traq| और सौम्य हे। भांग लेपन कर्ण आभूषण पूरे मुख भाग पर भांग दोनों ओर स्वर्णिम कर्ण लेपन से शांत एवं थ्यानमम्न आभूषण श्रूंगार की स्वरूप निर्मित किया गया है। दिव्यता को बढ़ाते हें। अर्धचंद्र तिलक राम' बेलपत्र श्ूंगार माथे के मध्य सुंदर दाई और 'राम' अंकित अर्थचंद्र अलंकरण बनाया विशेष बेलपत्र श्रूंगार ৪, নিমক মীনব गया সকিপান কী সকম रंगीन कला दिखाई देती है। करता है। बिंदु माला बादाम भस्म स्वरूप अर्थचंद्र के ऊपर बादाम प्राकृतिक भस्म का मूल आकृति की अर्धवूत माला स्वरूप आज भी साफ ऊर्जा और दिव्यता का दिखाई दे रहा है॰जो प्रतीक है। সচাকাল কী সচিসা दर्शाता है। रजत अलंकरण दिव्य आरती थीम माथे के दोनों ओर चांदी जेसे दिव्य आरती की पूष्टभूमि बेलपत्र एवं चंद्राकार में महाकाल मंदिर ओर अलंकरण लगाए गए हैं। आरती की दिव्य झलक Rgs %IR मजवूत श्रस्ा को ओर बनाती है। गले के नीचे त्रिपुंड तिलक रजत आधार पीठिका महादेव के शिव तत्ब ओर शक्ति का प्रतीक है। नीचे चांदी की चमकदार পীতিকা নানা ক নিম स्वरूप को और भव्य बना रही है। भस्म-आरती की विशेषता ब्रह्ममुहूर्त में की जाती हे। यह आरती जीवन की नश्वरता और शिव की अमरता का प्रतीक ह। यह आरती प्रतिदिन प्रातष इस दिव्य आरती के दर्शन मात्र से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यहां बाबा महाकाल को श्मशान से लाई गई पवित्र भस्म अर्पित की जाती है। श्री महाकालेश्वर, उज्जैन   ८४  विशेष प्रातः कालीन भस्म आरती दर्शन आज का 07-May-2026 मुखाकृति सोम्य पुष्प मुकुट हल्के केसरिया अधरों गेंदा, सकेद और गुलाबी फूलों से दो॰स्तरीय सुंदर के साथ आज बाचा को अत्यंत शांत मुकूट सजाया गया है। Traq| और सौम्य हे। भांग लेपन कर्ण आभूषण पूरे मुख भाग पर भांग दोनों ओर स्वर्णिम कर्ण लेपन से शांत एवं थ्यानमम्न आभूषण श्रूंगार की स्वरूप निर्मित किया गया है। दिव्यता को बढ़ाते हें। अर्धचंद्र तिलक राम' बेलपत्र श्ूंगार माथे के मध्य सुंदर दाई और 'राम' अंकित अर्थचंद्र अलंकरण बनाया विशेष बेलपत्र श्रूंगार ৪, নিমক মীনব गया সকিপান কী সকম रंगीन कला दिखाई देती है। करता है। बिंदु माला बादाम भस्म स्वरूप अर्थचंद्र के ऊपर बादाम प्राकृतिक भस्म का मूल आकृति की अर्धवूत माला स्वरूप आज भी साफ ऊर्जा और दिव्यता का दिखाई दे रहा है॰जो प्रतीक है। সচাকাল কী সচিসা दर्शाता है। रजत अलंकरण दिव्य आरती थीम माथे के दोनों ओर चांदी जेसे दिव्य आरती की पूष्टभूमि बेलपत्र एवं चंद्राकार में महाकाल मंदिर ओर अलंकरण लगाए गए हैं। आरती की दिव्य झलक Rgs %IR मजवूत श्रस्ा को ओर बनाती है। गले के नीचे त्रिपुंड तिलक रजत आधार पीठिका महादेव के शिव तत्ब ओर शक्ति का प्रतीक है। नीचे चांदी की चमकदार পীতিকা নানা ক নিম स्वरूप को और भव्य बना रही है। भस्म-आरती की विशेषता ब्रह्ममुहूर्त में की जाती हे। यह आरती जीवन की नश्वरता और शिव की अमरता का प्रतीक ह। यह आरती प्रतिदिन प्रातष इस दिव्य आरती के दर्शन मात्र से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यहां बाबा महाकाल को श्मशान से लाई गई पवित्र भस्म अर्पित की जाती है। - ShareChat