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Om shanti #🙏 বজৰংবলি 🙏 #😇আধ্যাত্মিকতা🙏 #ভগৱান বিষ্ণু🙏 #🙏 আমাৰ সংস্কৃতি আৰু পৰম্পৰা #🙏মোৰ অসম মোৰ গৌৰৱ
🙏 বজৰংবলি 🙏 - मुरली से 5 मुख्य पॉइंट्स 36 BRAHIMA KUMARIS 03  enee     মীঠ ব্রব্জী 15.04.2026 २. यह भारत जब स्वर्ग था तो वहां कोई बीमार नहीं होता था यहां तो सब रोगी हैं क्योंकि मनुष्य देह-अभिमानी हो गए हैं। जब तक पांच विकारों का दान न दें तब तक दुःख का ग्रहण छूट नहीं सकता, २६ कला संपूर्ण देवता बन नहीं सकते। देवी-देवतायें देही अभिमानी रहते थे इसलिए सदा सुखी थे। अभी तो एक-दो को दुःख ही देते रहते | २. इस पतित दुनिया में पतित मनुष्य को सुख-्शांति मिल नहीं सकती।  सुखी बनाने वाला एक बाप ही है तो उनसे सुख-शांति का वर्सा लेने सदा ड्रामा को नहीं समझेंगे के लिए पुरुषार्थ करना चाहिए। जब तक मनुष्य इस  दुःखी रहेंगे। तो पहले इस ड्रामा को भी जानना जरूरी है। तब तक बिल्कुल 7 ना आये कि हम धनवान है। ये धन- ३. इस बात का देह-अभिमान माल तो मिट्टी में मिल जाना है। याद रखो.. अब नाटक पूरा हुआ, सबको वापिस घर जाना है। विकारों के वंश के अंश को भी समाप्त करने वाले वरदानः- सर्व समर्पण वा ट्रस्टी भव किसी की विशेषता के कारण उससे विशेष स्नेह स्लोगनः- ये भी लगाव है। जाना - मुरली से 5 मुख्य पॉइंट्स 36 BRAHIMA KUMARIS 03  enee     মীঠ ব্রব্জী 15.04.2026 २. यह भारत जब स्वर्ग था तो वहां कोई बीमार नहीं होता था यहां तो सब रोगी हैं क्योंकि मनुष्य देह-अभिमानी हो गए हैं। जब तक पांच विकारों का दान न दें तब तक दुःख का ग्रहण छूट नहीं सकता, २६ कला संपूर्ण देवता बन नहीं सकते। देवी-देवतायें देही अभिमानी रहते थे इसलिए सदा सुखी थे। अभी तो एक-दो को दुःख ही देते रहते | २. इस पतित दुनिया में पतित मनुष्य को सुख-्शांति मिल नहीं सकती।  सुखी बनाने वाला एक बाप ही है तो उनसे सुख-शांति का वर्सा लेने सदा ड्रामा को नहीं समझेंगे के लिए पुरुषार्थ करना चाहिए। जब तक मनुष्य इस  दुःखी रहेंगे। तो पहले इस ड्रामा को भी जानना जरूरी है। तब तक बिल्कुल 7 ना आये कि हम धनवान है। ये धन- ३. इस बात का देह-अभिमान माल तो मिट्टी में मिल जाना है। याद रखो.. अब नाटक पूरा हुआ, सबको वापिस घर जाना है। विकारों के वंश के अंश को भी समाप्त करने वाले वरदानः- सर्व समर्पण वा ट्रस्टी भव किसी की विशेषता के कारण उससे विशेष स्नेह स्लोगनः- ये भी लगाव है। जाना - - ShareChat