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✍️ साहित्य एवं शायरी - Iqsayur_uur-_31 जब खुद को आईने मे देखता हूँ तो तरस आता है कि कोई इतना भी बदनसीब कैसे हो सकता ह...।। Iqsayur_uur-_31 जब खुद को आईने मे देखता हूँ तो तरस आता है कि कोई इतना भी बदनसीब कैसे हो सकता ह...।। - ShareChat