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#Radha Krishna Radha Krishna Radha Krishna Radha Krishna Radha Krishna Radha Krishna Radha Krishna Ra
Radha Krishna Radha Krishna Radha Krishna Radha Krishna Radha Krishna Radha Krishna Radha Krishna Ra - जे न मित्र दुःख होहिं तिन्हहि बिलोकत पातक भारी Il दुखारी | निज दुःख गिरि सम रज करि जाना | मित्रक दुःख रज मेरु समाना Il भावार्थ- जो लोग मित्र के दुःख से दुःखी नहीं होते, उन्हें देखने से ही बड़ा पाप लगता है। अपने पर्वत के समान दुःख को धूल के समान और मित्र के धूल के समान दुःख को सुमेरु (बड़े भारी पर्वत) के समान जाने।। जे न मित्र दुःख होहिं तिन्हहि बिलोकत पातक भारी Il दुखारी | निज दुःख गिरि सम रज करि जाना | मित्रक दुःख रज मेरु समाना Il भावार्थ- जो लोग मित्र के दुःख से दुःखी नहीं होते, उन्हें देखने से ही बड़ा पाप लगता है। अपने पर्वत के समान दुःख को धूल के समान और मित्र के धूल के समान दुःख को सुमेरु (बड़े भारी पर्वत) के समान जाने।। - ShareChat