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#✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - हो सके तो मुस्कुराहट बाँटिये रिश्तों में कुछ सरसराहट बाँटिये! नीरस सी हो चली है ज़िन्दगी बहुत , थोड़ी सी इसमें शरारत बाँटिये! यूँ ही भाग रहे हैं परछाइयों के पीछे, q अब सुकून की कोई इबादत बाँटिये! ज़िन्दगी यूँ ही न बीत जाये गिले शिकवों म बेचैनियों को कुछ तो राहत बाँटिये. ! ! ! हो सके तो मुस्कुराहट बाँटिये रिश्तों में कुछ सरसराहट बाँटिये! नीरस सी हो चली है ज़िन्दगी बहुत , थोड़ी सी इसमें शरारत बाँटिये! यूँ ही भाग रहे हैं परछाइयों के पीछे, q अब सुकून की कोई इबादत बाँटिये! ज़िन्दगी यूँ ही न बीत जाये गिले शिकवों म बेचैनियों को कुछ तो राहत बाँटिये. ! ! ! - ShareChat