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#सब बाबा जयगुरूदेव जी महाराज की देन है #😃 शानदार स्टेटस #❤️क्यूट व्हाट्सएप स्टेटस #🤟 सुपर स्टेटस #व्हाट्सएप्प स्टेटस
सब बाबा जयगुरूदेव जी महाराज की देन है - इस समीकरण को उलट का एक ऐसा बाजार सज गया लिए मीडिया घरानों को अब जनसरोकार ही रहेगी। सन्तों के पास की छोटी चीजों की కగాTా इच्छा के बजाय बड़ी चीज की इच्छा, यानी साधना में तरक्की की इच्छा लेकर के जाना चाहिए बाबा उमाकान्त जी महाराज মী ব৪্ক হাব্বিন থা নানী ঔ মাখনা देच రాశె নিমক লিব কল্কা যমা কি, "নী বৃত্তা कीन्हीं मन माहिं, हरि प्रताप कछु 7" दुर्लभ २ कोलफील्ड मिरर २६ अप्रैल (रुद्रपुर उतराखंड)ः परम् पूज्य परम् सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 2 अप्रैल २०२६ के सतसंग में कहा कि जन्मते और मरते बड़ी तकलीफ होती है। मरते समय समय तो इतनी तकलीफ होती है जितनी तकलीफ हजारों बिच्छुओं के डंक मारने पर होती है। सहजो बाई ने कहा "सहजो मौत के समय पीड़ा उठे अपार बिच्छू 7 साठ हजार ज्यों॰ डंक मारें एक साथ" अगर उस पीडा से आप बचना चाहते होे तब तो जो बताया जा रहा है उसको करो। जी महाराज सत 17 उसाक्ल ా अभी तक आपने जो गलती की॰ सो तो তীম বক মুক্নর্ম ম তীন যমা নী ওমকী कीः चाहे शरीर से आपने पाप करके शारीरिक कर्म इकट्ठा किया, चाहे मन से हिम्मत बढ़ गई और दूसरा मुकदमा जो भजनानंदी हो जाते हैं. जो अपने अंदर सेवक का भाव लेे आते हैं और वे कायम कर लेता है और कहता है कि हम गलत सोचकर मन के कहने पर पाप सुख को त्याग देते हैं करके मनसा पाप इकट्ठा किया। लेकिन इसमें भी जीत जाएं ताकि हमारा नाम हो जो भजनानंदी हो जाते हैं जो अपने अंदर आज आप उस पाप की माफी मांग लो जाएगा| तो बस इन्हीं सब चीजों में वह सेवक का भाव ले आते हैं उन्हें सुख फंस जाता है। और कान पकड़ लो कि अब गलती नहीं वह सिर्फ छोटी चीजें ही मांगता हैः दुनिया  करेंगे और नामदान लेकर साधना करेंगें| कहां? कहा गया है "सेवक सुत पति मातु भरोसें । रहइ की चीजें मांगता है। लेकिन जो बड़ी चीज ऋषि-मुनि जब योग साधना करते थे असोच बनइ प्रभु पोसें Il  की इच्छा लेकर के आता है कि हमको चाहे रुपया- पैसा में बरकत मिले या ना तब उनमें कौन सी शक्ति आ जाती व्यसनी धन सुख गति व्यभिचारी। इनहि सुखद नहिं जगत मझारी II " मिले बस हमारी साधना में बरकत मिल ೫? तो वे सुख को त्याग देते हैं और इच्छा जो यह पाने के लिए सन्तों के पास जाए। तो उसके लिए वह चीज आसान हो खत्म हो जाती है। जब उसकी इच्छा खत्म जाता है कि हमको धन मिल जाती है क्योंकि भजन से वह शक्ति आ जाए हम मुकदमा जीत जाएं हमारी लॉटरी निकल हो जाती है तब भी वह संतुष्ट हो जाता है जाती है जिसके लिए कहा गया जाए, हमारे लड़के की नौकरी लग जाए. "जो इच्छा कीन्हीं मन माहिं हरि प्रताप और जिस चीज की यानी साधना में और मांगता ही रहता है। जैसे अगर तरक्की की इच्छा लेकर सन्तों के पास नाहिं" ব্ুলম  कछु इच्छा पूरी हो जाए तो भी लड़के की नौकरी लग गई तो आ कर जैसे ऋषि मुनि जब योग साधना करते थे गया अगर वह संतुष्ट हो जाता है। कहते हैं कि उसका प्रोमोशन हो जाए। तब उनमें वह शक्ति आ जाती थी। इस समीकरण को उलट का एक ऐसा बाजार सज गया लिए मीडिया घरानों को अब जनसरोकार ही रहेगी। सन्तों के पास की छोटी चीजों की కగాTా इच्छा के बजाय बड़ी चीज की इच्छा, यानी साधना में तरक्की की इच्छा लेकर के जाना चाहिए बाबा उमाकान्त जी महाराज মী ব৪্ক হাব্বিন থা নানী ঔ মাখনা देच రాశె নিমক লিব কল্কা যমা কি, "নী বৃত্তা कीन्हीं मन माहिं, हरि प्रताप कछु 7" दुर्लभ २ कोलफील्ड मिरर २६ अप्रैल (रुद्रपुर उतराखंड)ः परम् पूज्य परम् सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 2 अप्रैल २०२६ के सतसंग में कहा कि जन्मते और मरते बड़ी तकलीफ होती है। मरते समय समय तो इतनी तकलीफ होती है जितनी तकलीफ हजारों बिच्छुओं के डंक मारने पर होती है। सहजो बाई ने कहा "सहजो मौत के समय पीड़ा उठे अपार बिच्छू 7 साठ हजार ज्यों॰ डंक मारें एक साथ" अगर उस पीडा से आप बचना चाहते होे तब तो जो बताया जा रहा है उसको करो। जी महाराज सत 17 उसाक्ल ా अभी तक आपने जो गलती की॰ सो तो তীম বক মুক্নর্ম ম তীন যমা নী ওমকী कीः चाहे शरीर से आपने पाप करके शारीरिक कर्म इकट्ठा किया, चाहे मन से हिम्मत बढ़ गई और दूसरा मुकदमा जो भजनानंदी हो जाते हैं. जो अपने अंदर सेवक का भाव लेे आते हैं और वे कायम कर लेता है और कहता है कि हम गलत सोचकर मन के कहने पर पाप सुख को त्याग देते हैं करके मनसा पाप इकट्ठा किया। लेकिन इसमें भी जीत जाएं ताकि हमारा नाम हो जो भजनानंदी हो जाते हैं जो अपने अंदर आज आप उस पाप की माफी मांग लो जाएगा| तो बस इन्हीं सब चीजों में वह सेवक का भाव ले आते हैं उन्हें सुख फंस जाता है। और कान पकड़ लो कि अब गलती नहीं वह सिर्फ छोटी चीजें ही मांगता हैः दुनिया  करेंगे और नामदान लेकर साधना करेंगें| कहां? कहा गया है "सेवक सुत पति मातु भरोसें । रहइ की चीजें मांगता है। लेकिन जो बड़ी चीज ऋषि-मुनि जब योग साधना करते थे असोच बनइ प्रभु पोसें Il  की इच्छा लेकर के आता है कि हमको चाहे रुपया- पैसा में बरकत मिले या ना तब उनमें कौन सी शक्ति आ जाती व्यसनी धन सुख गति व्यभिचारी। इनहि सुखद नहिं जगत मझारी II " मिले बस हमारी साधना में बरकत मिल ೫? तो वे सुख को त्याग देते हैं और इच्छा जो यह पाने के लिए सन्तों के पास जाए। तो उसके लिए वह चीज आसान हो खत्म हो जाती है। जब उसकी इच्छा खत्म जाता है कि हमको धन मिल जाती है क्योंकि भजन से वह शक्ति आ जाए हम मुकदमा जीत जाएं हमारी लॉटरी निकल हो जाती है तब भी वह संतुष्ट हो जाता है जाती है जिसके लिए कहा गया जाए, हमारे लड़के की नौकरी लग जाए. "जो इच्छा कीन्हीं मन माहिं हरि प्रताप और जिस चीज की यानी साधना में और मांगता ही रहता है। जैसे अगर तरक्की की इच्छा लेकर सन्तों के पास नाहिं" ব্ুলম  कछु इच्छा पूरी हो जाए तो भी लड़के की नौकरी लग गई तो आ कर जैसे ऋषि मुनि जब योग साधना करते थे गया अगर वह संतुष्ट हो जाता है। कहते हैं कि उसका प्रोमोशन हो जाए। तब उनमें वह शक्ति आ जाती थी। - ShareChat