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#📚कविता-कहानी संग्रह #✍️ साहित्य एवं शायरी #📓 हिंदी साहित्य #😛 व्यंग्य 😛 #😄फनी शायरी
📚कविता-कहानी संग्रह - हों चाहे परकोटे या हों तिजोरी से मकान नहीं समझना कि ये घर होत ऐं सुनसान।  बतें जरा सोच समझकर तुम करना यारो , क्योँकि होते हैं इनमें भी दीवारों के कान।।  अरविंद 'असली हों चाहे परकोटे या हों तिजोरी से मकान नहीं समझना कि ये घर होत ऐं सुनसान।  बतें जरा सोच समझकर तुम करना यारो , क्योँकि होते हैं इनमें भी दीवारों के कान।।  अरविंद 'असली - ShareChat