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#🌙 गुड नाईट
🌙 गुड नाईट - 10:39 6 Idi 0 5G+ 1 WR" Reels राहत इंदौरी रोज़ु तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है। चाँद पागल है अँधेरे में निकल पड़ता है। एक दीवाना मुसाफ़िर है मिरी आँखों में वक़्त बे-वक़्त ठॅहर जाता है चल पड़ता है। अपनी ताबीर के चक्कर में मिरा जागता ख़्वाब रोज़ सूरज की तरह घर से निकल पड़ता है। रोज़ पत्थर की हिमायत में ग़़ज़ल लिखते हैं रोज शीशों से कोई काम निकल पड़ता है। उस की याद आई है साँसो ज़रा आहिस्ता चलो धड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है। )2K RAKHT-F-SUKHAN )02 Rakht-eSukhan Follow khan  Original audio Rakht रोज़ तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है. more Add a comment 10:39 6 Idi 0 5G+ 1 WR" Reels राहत इंदौरी रोज़ु तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है। चाँद पागल है अँधेरे में निकल पड़ता है। एक दीवाना मुसाफ़िर है मिरी आँखों में वक़्त बे-वक़्त ठॅहर जाता है चल पड़ता है। अपनी ताबीर के चक्कर में मिरा जागता ख़्वाब रोज़ सूरज की तरह घर से निकल पड़ता है। रोज़ पत्थर की हिमायत में ग़़ज़ल लिखते हैं रोज शीशों से कोई काम निकल पड़ता है। उस की याद आई है साँसो ज़रा आहिस्ता चलो धड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है। )2K RAKHT-F-SUKHAN )02 Rakht-eSukhan Follow khan  Original audio Rakht रोज़ तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है. more Add a comment - ShareChat