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#🖌️मेरी चित्रकारी🎨 #🎤मेरी कविता-शायरी
🖌️मेरी चित्रकारी🎨 - अगर मौका मिला कभी, तो कागज़ पर अपनी थकान लिखूँगा, मज़बूत कंधों के पीछे छुपा, वो छोटा सा इंसान लिखूँगा। वो जो हर मुश्किल में मुस्कुरा कर कहता है, उस एक झूठ के पीछे दबे, সন ঠীক্ধ ই, हज़ारों बेबस तूफान लिखूँगा| नहीं लिखूँगा मैं सिर्फ अपनी जीत के चर्चे में , मैं तो हार कर भी जो मुस्कुराया, दुनिया लिखूँगा | वो लहुलुहान स्वाभिमान f্থ মী लिखूँगा वो रातें , जब तकिया गवाह था सिसकियों का, पर सुबह उठकर पहना, वो चट्टान जैसा इंसान लिखूँगा। Ta7 ಕ1 , मैं लिख पाऊँ कुछ तो, मैं खुद को के हर अपनी रूह ज़ख्म को, अपना लिखूँगा| ITTT अगर मौका मिला कभी, तो कागज़ पर अपनी थकान लिखूँगा, मज़बूत कंधों के पीछे छुपा, वो छोटा सा इंसान लिखूँगा। वो जो हर मुश्किल में मुस्कुरा कर कहता है, उस एक झूठ के पीछे दबे, সন ঠীক্ধ ই, हज़ारों बेबस तूफान लिखूँगा| नहीं लिखूँगा मैं सिर्फ अपनी जीत के चर्चे में , मैं तो हार कर भी जो मुस्कुराया, दुनिया लिखूँगा | वो लहुलुहान स्वाभिमान f্থ মী लिखूँगा वो रातें , जब तकिया गवाह था सिसकियों का, पर सुबह उठकर पहना, वो चट्टान जैसा इंसान लिखूँगा। Ta7 ಕ1 , मैं लिख पाऊँ कुछ तो, मैं खुद को के हर अपनी रूह ज़ख्म को, अपना लिखूँगा| ITTT - ShareChat