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#जय माँ गायत्री जय गुरुवर
जय माँ गायत्री जय गुरुवर - हरि शरणं स्वारथ मीत सकल जग माहीं सपनेहुँ प्रभु परमारथ नाहीं हे प्रभु! इस संसार में बाकी सभी लोग केवल स्वार्थ के मित्र हैं। यहाँ तक कि स्वप्न में भी किसी के मन में का परम हित दूसरों (परमार्थ) करने की शुद्ध भावना नहीं होती। यानी संसार के सभी रिश्तों के पीछे कोई न कोई सांसारिक कारण या स्वार्थ छिपा होता है एक सिर्फ आप ही हैं जो अपने भक्तों का बिना किसी कारण हित चाहते हैं और कल्याण करते हैं हरि शरणं स्वारथ मीत सकल जग माहीं सपनेहुँ प्रभु परमारथ नाहीं हे प्रभु! इस संसार में बाकी सभी लोग केवल स्वार्थ के मित्र हैं। यहाँ तक कि स्वप्न में भी किसी के मन में का परम हित दूसरों (परमार्थ) करने की शुद्ध भावना नहीं होती। यानी संसार के सभी रिश्तों के पीछे कोई न कोई सांसारिक कारण या स्वार्थ छिपा होता है एक सिर्फ आप ही हैं जो अपने भक्तों का बिना किसी कारण हित चाहते हैं और कल्याण करते हैं - ShareChat