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#💔दर्द भरी कहानियां
💔दर्द भरी  कहानियां - 690గ" चुकी हूँ मैं" ना किसी से दूर जा रही हूँ॰  ये कैसी 7 ना किसी ` जंग है अंदर,  के  पास रह पा रही हूँ जिसमें हर 7 रोज़ खुद से हार रही हूँl ना दर्द पूरा कम होता है ना ऑंसू खुलकर कुछ ज़ख्म  ऐसे भी होते हैं - { गिरते हैं जो बस  इंसान को ख़ामोश करते हैं दिल  না अब पहले जैसा  है, ना ये दुनिया वैसी लगती है मैं वही ` हूँ शायद. बस अब खुद में नहीं बस्तीत / 690గ" चुकी हूँ मैं" ना किसी से दूर जा रही हूँ॰  ये कैसी 7 ना किसी ` जंग है अंदर,  के  पास रह पा रही हूँ जिसमें हर 7 रोज़ खुद से हार रही हूँl ना दर्द पूरा कम होता है ना ऑंसू खुलकर कुछ ज़ख्म  ऐसे भी होते हैं - { गिरते हैं जो बस  इंसान को ख़ामोश करते हैं दिल  না अब पहले जैसा  है, ना ये दुनिया वैसी लगती है मैं वही ` हूँ शायद. बस अब खुद में नहीं बस्तीत / - ShareChat