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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - उजड़ गए, सब बाग बगीचे। दो गमलों में , शान बहुत है। । मट्ठा , दही, नहीं खाते हैं। कहते हैं ज़ुकाम बहुत है। । पीते हैं, जब चाय, तब कहीं| कहते हैं आराम बहुत है।। बंद हो गई, चिट्ठी, पत्री| व्हाट्सएप पर, पैगाम बहुत है।। आदी हैं, ए॰सी॰ के इतने। बाहर, गर्मी बहुत है।। कहते झुके झुके, स्कूली बच्चे। बस्तों में, सामान बहुत है।। नही बचे, कोई सम्बन्धी। अकड़ ऐंठ, अहसान बहुत है। ! gfae3if ढेर लगा है। का पर इंसान , परेशान बहुत है।। उजड़ गए, सब बाग बगीचे। दो गमलों में , शान बहुत है। । मट्ठा , दही, नहीं खाते हैं। कहते हैं ज़ुकाम बहुत है। । पीते हैं, जब चाय, तब कहीं| कहते हैं आराम बहुत है।। बंद हो गई, चिट्ठी, पत्री| व्हाट्सएप पर, पैगाम बहुत है।। आदी हैं, ए॰सी॰ के इतने। बाहर, गर्मी बहुत है।। कहते झुके झुके, स्कूली बच्चे। बस्तों में, सामान बहुत है।। नही बचे, कोई सम्बन्धी। अकड़ ऐंठ, अहसान बहुत है। ! gfae3if ढेर लगा है। का पर इंसान , परेशान बहुत है।। - ShareChat