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#🙏सुविचार📿
🙏सुविचार📿 - जब अस्तित्व अपनी अंतिम सीमा पर था, और केवल प्रेम शेष रह गया था... ने देह का हर संकेत लहरों : अपने भीतर समेट लिया, पर वह आलिंगन वह अंतिम, अटूट आवेष मृत्यु के भी अधिकार में न आ सका. माँ आखिर तक *माँ॰ ही रही। . जब अस्तित्व अपनी अंतिम सीमा पर था, और केवल प्रेम शेष रह गया था... ने देह का हर संकेत लहरों : अपने भीतर समेट लिया, पर वह आलिंगन वह अंतिम, अटूट आवेष मृत्यु के भी अधिकार में न आ सका. माँ आखिर तक *माँ॰ ही रही। . - ShareChat