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देता है कोई ज़हर, तो कोई दवा देता है,
जो भी मिलता है आज़कल, दर्द बढ़ा देता है।
मदद की आश में हम हाथ बढ़ाते ही रहे,
यहाँ जो भी हाथ पकड़ता, वही गिरा देता है।
हमने समझा था जिसे अपना सबसे करीबी,
वही तो सरेआम अब, हमें दगा देता है।
चला था जो साथ मेरे साये की तरह,
वही मंज़िल पर पहुँच कर राह बदल लेता है।
दिलासा देने जो भी मेरे पास आता है,
पुराने ज़ख्मों को वही फ़िर ताज़ा कर देता है।
🦂💊 सुप्रभात 💊🦂 #❤️जीवन की सीख

