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#जिम्मेदारी #struggle #life is struggle #संघर्ष
जिम्मेदारी - और फिर. लिए जीने वाले हम, सपनों के 66 गिनते नहीं-कितने घंटे काम पर गुजार देते है स्निर्फ झुस्ा आस मेँ के एक दिन हमारा भी वक्त बदलेगा १ और फिर. लिए जीने वाले हम, सपनों के 66 गिनते नहीं-कितने घंटे काम पर गुजार देते है स्निर्फ झुस्ा आस मेँ के एक दिन हमारा भी वक्त बदलेगा १ - ShareChat