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#✍️ अनसुनी शायरी #✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ अनसुनी शायरी - वव्त की राह में पलों का गुज़रते हिसाब क्या रखना , दे जाए जो geh | ज़िंदगी में॰ वही याद रखना | बस गुलज़ार वव्त की राह में पलों का गुज़रते हिसाब क्या रखना , दे जाए जो geh | ज़िंदगी में॰ वही याद रखना | बस गुलज़ार - ShareChat