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#शब्द संवाद #📓 हिंदी साहित्य #📚कविता-कहानी संग्रह #✍️ साहित्य एवं शायरी
शब्द संवाद - हरराहुबेगानी पी एस यादव अजनबी ' उम्र में मत उलझिए हौसला से यह राज करें जवानी | के आंसुओं में मत खोइए खूबसूरत जिंदगानी| যামী सोचने से नहीं कर्म करने से ही मिलते हरेक मकाम , हमारी भूर्ले ही हमको बन जातीं पश्चाताप   निशानी] जोश में ही होश तलाशो क्यों बैठे चिंता   की सवारी] भटकाने को बहरूपिए बहुत कुंठा बहम की बीमारी | हल पहले सच को करो तलाश , हर समस्या का यहा जिस सलाह से हो बर्बादी समझो वो राह अनजानी जिंदगी की चाबी को हमेशा रखिए खुद के ही पास। गैर के हार्थों में जाते ही,यह करदेती   है सत्यानाश। खुद की मुस्कानों में ही तुम करिए हमसफर तलाश, यह जिँदगी तब समझो लगेगी समाधानों में सयानी कांटों में रहकर भी पुष्प हमेशा खुशबू ही করলানা| संशय के अंधियारों में कभी   सुलह नहीं मिल पाता द्वेष के भार्वों में प्रेम नहीं सिर्फ अवसादों का है डेरा , फैसले   से जिंदगी जैसे अनसुलझी विरूद् कहानी कोई दर्द देता और कोई बनता खुशियों का मरहम। कोई दोस्त बनकर देता दगा तो कोई बनता हमदम। কী অনভান নন ভূতা বিপ্খ্রাস নিনানা ;1 जब रास्ता मेहनत ही बन जाती है सफलता   भरी एक कहानी। खुद ही खोजने पडते हैं अपनी मंजि्लों के ठिकाने। भरे हुए 7 आराम से खो जाते   हैं धन से सारे खजाने। चट्टानों में भी मिलती नव राहें हौसले बुलंद हों तब समझदार हो मगर नहीं  जानते हर राह यहां बेगानी। हरराहुबेगानी पी एस यादव अजनबी ' उम्र में मत उलझिए हौसला से यह राज करें जवानी | के आंसुओं में मत खोइए खूबसूरत जिंदगानी| যামী सोचने से नहीं कर्म करने से ही मिलते हरेक मकाम , हमारी भूर्ले ही हमको बन जातीं पश्चाताप   निशानी] जोश में ही होश तलाशो क्यों बैठे चिंता   की सवारी] भटकाने को बहरूपिए बहुत कुंठा बहम की बीमारी | हल पहले सच को करो तलाश , हर समस्या का यहा जिस सलाह से हो बर्बादी समझो वो राह अनजानी जिंदगी की चाबी को हमेशा रखिए खुद के ही पास। गैर के हार्थों में जाते ही,यह करदेती   है सत्यानाश। खुद की मुस्कानों में ही तुम करिए हमसफर तलाश, यह जिँदगी तब समझो लगेगी समाधानों में सयानी कांटों में रहकर भी पुष्प हमेशा खुशबू ही করলানা| संशय के अंधियारों में कभी   सुलह नहीं मिल पाता द्वेष के भार्वों में प्रेम नहीं सिर्फ अवसादों का है डेरा , फैसले   से जिंदगी जैसे अनसुलझी विरूद् कहानी कोई दर्द देता और कोई बनता खुशियों का मरहम। कोई दोस्त बनकर देता दगा तो कोई बनता हमदम। কী অনভান নন ভূতা বিপ্খ্রাস নিনানা ;1 जब रास्ता मेहनत ही बन जाती है सफलता   भरी एक कहानी। खुद ही खोजने पडते हैं अपनी मंजि्लों के ठिकाने। भरे हुए 7 आराम से खो जाते   हैं धन से सारे खजाने। चट्टानों में भी मिलती नव राहें हौसले बुलंद हों तब समझदार हो मगर नहीं  जानते हर राह यहां बेगानी। - ShareChat