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#📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - आइना वही है ..और सूरत बदल गई. जवानी जाने कब, ,चुपके से ढल गई..! बढ रही है या घट रही है ये भी मालूम नहीं . 7/ / ये उम्र की साजिशें  मुझे भी छल गई.. जो कल था वो आज नहीं जो आज है वो कल नहीं के चक्रव्यूह में इस कल और आज ये ज़िंदगी ही फिसल गई आईना वही है और सूरत बदल गई जवानी जाने कब चुपके से निकल गई..  704 आइना वही है ..और सूरत बदल गई. जवानी जाने कब, ,चुपके से ढल गई..! बढ रही है या घट रही है ये भी मालूम नहीं . 7/ / ये उम्र की साजिशें  मुझे भी छल गई.. जो कल था वो आज नहीं जो आज है वो कल नहीं के चक्रव्यूह में इस कल और आज ये ज़िंदगी ही फिसल गई आईना वही है और सूरत बदल गई जवानी जाने कब चुपके से निकल गई..  704 - ShareChat